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दाल A vibrant top-view of steaming Indian dal tadka in a bowl, surrounded by colorful raw lentils (moong, masoor, toor, chana), fresh rotis, vegetables, and spices on a rustic wooden table, highlighting the nutrition and variety of lentils.

दाल का पोषण(dal nutrition): 10 अद्भुत लाभ और आसानी से पकाने के तरीके

नमस्ते दोस्तों! आज हम बात करेंगे एक ऐसे खाद्य पदार्थ की जो भारतीय रसोई का अहम हिस्सा है – दाल। दाल का पोषण इतना समृद्ध है कि यह न सिर्फ हमारी रोजमर्रा की डाइट को संतुलित बनाता है, बल्कि कई स्वास्थ्य समस्याओं से भी बचाव करता है। अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो प्रोटीन की कमी से जूझ रहे हैं, या पाचन संबंधी दिक्कतों से परेशान हैं, तो दाल आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। कई लोग सोचते हैं कि दाल सिर्फ सादा और बोरिंग होती है, लेकिन ये सही तरीके से पकाई जाए तो यह स्वादिष्ट और पौष्टिक दोनों बन जाती है।आज के इस स्वास्थ को अच्छा बनाने के लिए लिखे जाने वाले मेरे इस लेख में मैं दाल के पोषक तत्व पर गहराई से चर्चा करूँगा, इसके लाभ बताऊंगा और कुछ आसान रेसिपी भी शेयर करने की कोशिश करूँगा। चलिए, शुरू करते हैं!

दाल क्या है और इसके प्रकार

दाल, जिसे अंग्रेजी में लेंटिल्स कहते हैं, एक प्रकार की फली है जो विभिन्न रूपों में उपलब्ध होती है। भारत में दाल को मुख्य रूप से सब्जी, सूप या साइड डिश के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दाल कई प्रकार की भी होती है, और हर प्रकार का अपना अनोखा दाल का पोषण प्रोफाइल होता है? उदाहरण के लिए, मूंग दाल हल्की और आसानी से पचने वाली होती है, जबकि चना दाल में ज्यादा प्रोटीन होता है।

अगर आप दाल चुनते समय कन्फ्यूज होते हैं कि कौन सी दाल आपके लिए बेहतर है, तो यहां एक तुलनात्मक तालिका है मैं कई रिसर्च के बाद आप लोगो के सामने रख रहा हूँ उम्मीद है इससे आपको काफी मदद मिलेगी और ये विभिन्न प्रकार की दालों के दाल के पोषक तत्व को दिखाती है। यह तालिका 100 ग्राम पकी हुई दाल पर आधारित है

दाल का प्रकारप्रोटीन (ग्राम)फाइबर (ग्राम)आयरन (मिलीग्राम)कैलोरीमुख्य लाभ
मूंग दाल (Moong Dal)147.63.5105पाचन सुधार, वजन कम करने में मदद
मसूर दाल (Masoor Dal)983.3116हृदय स्वास्थ्य, एनर्जी बूस्ट
चना दाल (Chana Dal)8.84.62.7160मांसपेशियां मजबूत, डायबिटीज कंट्रोल
तूर दाल (Toor Dal)116.52.9120इम्यूनिटी बढ़ाना, हड्डियां मजबूत
उड़द दाल (Urad Dal)135.53.8140कोलेस्ट्रॉल कम करना, पोटैशियम से भरपूर
राजमा (Kidney Beans, though not strict dal but similar)8.76.42.2127फोलेट और मैग्नीशियम से समृद्ध

इस तालिका से साफहोता है कि हर दाल अपने आप में अनोखी है। अगर आपका दाल से वजन कम करना का इरादा है, तो मूंग दाल चुनें क्योंकि इसमें कैलोरी कम और फाइबर ज्यादा है। वहीं, अगर आप एथलीट हैं या ज्यादा दाल में प्रोटीन की तलाश में हैं, तो उड़द या चना दाल बेहतर रहेगी। याद रखें, विविधता लाने की आदत डालें – हर हफ्ते अलग-अलग दालें ट्राई(try) करें ताकि सभी पोषक तत्व मिलें।

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दाल के पोषक तत्व: एक गहराई से नजर

अब बात करते हैं दाल का पोषण के मुख्य घटकों की।

  • दाल प्रोटीन का एक प्लांट-बेस्ड स्रोत है, जो शाकाहारी लोगों के लिए आदर्श है। क्युकी प्रोटीन लेने के लिए सबसे पहले उनको दाल पर ही निर्भर होना होता है 100 ग्राम पकी हुई दाल में औसतन 9-18 ग्राम दाल में प्रोटीन होता है, जो मांस के बराबर है लेकिन बिना कोलेस्ट्रॉल के।
  • इसके अलावा, दाल में फाइबर की मात्रा 7-15 ग्राम तक होती है, जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है।
  • क्या आप जानते हैं कि दाल में आयरन की अच्छी मात्रा होती है? महिलाओं और बच्चों में आयरन की कमी एक आम समस्या है, जो थकान और कमजोरी पैदा करती है। दाल इस कमी को पूरा करने में मदद करती है, खासकर जब इसे विटामिन सी वाले फूड्स जैसे नींबू के साथ खाया जाए।
  • इसी तरह, दाल में पोटैशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है, जबकि दाल में फोलेट जो कि गर्भवती महिलाओं के लिए जरूरी है क्योंकि यह बच्चे के विकास में सहायक होता है।
  • दाल में मैग्नीशियम होता है जो मांसपेशियों और नर्व्स को रिलैक्स करता है, जो स्ट्रेस से जूझ रहे लोगों की फ्रस्ट्रेशन को कम कर सकता है।
  • दाल में विटामिन बी एनर्जी लेवल बढ़ाता है, और दाल में कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है।
  • दाल में जिंक इम्यून सिस्टम को बूस्ट करता है।

ये सभी तत्व मिलकर दाल को एक सुपरफूड बनाते हैं। अगर आपकी इंटेंशन है स्वस्थ रहना, तो दाल को अपनी डाइट में शामिल करें – यह आपकी पेन पॉइंट्स जैसे कम एनर्जी या कमजोर इम्यूनिटी को दूर करेगी।

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दाल खाने के फायदे: स्वास्थ्य पर प्रभाव

दाल खाने के फायदे अनगिनत हैं।

  • सबसे पहले, दाल के स्वास्थ्य लाभ में हृदय स्वास्थ्य का जिक्र जरूरी है। दाल से हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है क्योंकि इसमें सॉल्यूबल फाइबर होता है जो दाल से कोलेस्ट्रॉल कम करना में मदद करता है। अध्ययनों से पता चला है कि रोजाना दाल खाने से एलडीएल (बैड) कोलेस्ट्रॉल 5-10% तक कम हो सकता है।

अगर आप दाल से वजन कम करना चाहते हैं, तो यह आपके लिए परफेक्ट श्रोत हो सकता है है। उच्च फाइबर की मात्रा और प्रोटीन की वजह से यह पेट भरा रखता है, जिससे ओवरईटिंग की फ्रस्ट्रेशन दूर होती है। एक अध्ययन में पाया गया कि दाल खाने वाले लोग औसतन 1-2 किलो ज्यादा वजन कम करते हैं। इसके अलावा, दाल से पाचन सुधार होता है – कब्ज या आईबीएस जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

डायबिटीज पेशेंट्स के लिए दाल से डायबिटीज कंट्रोल में एक बड़ा लाभ है। इसका लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स ब्लड शुगर को स्थिर रखता है। दाल से एनर्जी बढ़ाना भी आसान है क्योंकि इसमें कॉम्प्लेक्स कार्ब्स होते हैं जो धीरे-धीरे एनर्जी रिलीज करते हैं। दाल से हड्डियां मजबूत बनाने में कैल्शियम और मैग्नीशियम मदद करते हैं, जबकि दाल से इम्यूनिटी बूस्ट जिंक और फोलेट से होता है।

  • दाल से वजन कम करना: दैनिक कैलोरी इनटेक कम करता है।
  • दाल से पाचन सुधार: फाइबर से कब्ज दूर।
  • दाल से हृदय स्वास्थ्य: कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर कंट्रोल।
  • दाल से डायबिटीज कंट्रोल: शुगर लेवल स्थिर।
  • दाल से एनर्जी बढ़ाना: लंबे समय तक ऊर्जा।
  • दाल से हड्डियां मजबूत: ऑस्टियोपोरोसिस से बचाव।
  • दाल से इम्यूनिटी बूस्ट: संक्रमण से लड़ने की क्षमता।
  • दाल से कोलेस्ट्रॉल कम करना: हार्ट अटैक रिस्क कम।

ये लाभ आपकी मुख्य डिजायर्स जैसे स्वस्थ जीवन जीने को पूरा करते हैं। अगर आपकी इंटेंशन है फैमिली को हेल्दी फूड देना, तो दाल से बेहतर क्या हो सकता है?

मसूर दाल बारे में सब कुछ

मसूर दाल पोषक तत्वों से भरपूर आहार में उपयोगी हो सकती है। इसके स्वास्थ्य लाभों में फाइबर, प्रोटीन और महत्वपूर्ण विटामिन शामिल हैं। मसूर दाल फलीदार परिवार (लेग्यूम) की सदस्य है और खाने योग्य बीज हैं। ये अपनी लेंस जैसी आकृति के लिए प्रसिद्ध हैं और इन्हें बाहरी छिलके सहित या बिना छिलके के बेचा जाता है। हालांकि ये तुर्की, सीरिया, जॉर्डन, मोरक्को और ट्यूनीशिया जैसे देशों में आम भोजन हैं, लेकिन आजकल मसूर दाल का सबसे अधिक उत्पादन कनाडा में होता है।

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मसूर दाल के विभिन्न प्रकार

मसूर दाल को अक्सर उनके रंग के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है, जो पीले और लाल से लेकर हरे, भूरे या काले तक हो सकता है। यहां कुछ सबसे आम प्रकार हैं:

  • भूरी (Brown): ये सबसे अधिक खाई जाने वाली प्रकार हैं। इनका स्वाद मिट्टी जैसा होता है, ये पकने पर आकार अच्छा बनाए रखती हैं और स्ट्यू तथा सूप में बेहतरीन लगती हैं।
  • प्यू (Puy): ये फ्रांस के ले प्यू क्षेत्र से आती हैं। रंग में समान लेकिन हरी मसूर से आकार में लगभग एक-तिहाई छोटी होती हैं और इनका स्वाद तीखा होता है।
  • हरी (Green): ये आकार में विभिन्न हो सकती हैं और आमतौर पर प्यू मसूर की रेसिपी में सस्ता विकल्प होती हैं।
  • पीली और लाल (Yellow and Red): ये छिलके उतारी हुई होती हैं और जल्दी पक जाती हैं। दाल बनाने में बढ़िया हैं और इनका स्वाद कुछ मीठा होता है।
  • बेलुगा (Beluga): ये छोटी काली मसूर हैं जो कैवियार जैसी दिखती हैं। गर्म सलाद के लिए अच्छी आधार बनाती हैं।

अत्यधिक पौष्टिक

मसूर दाल को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, और ये पोषक तत्वों का सस्ता भी स्रोत हैं। उदाहरण के लिए, ये बी विटामिन, मैग्नीशियम, जिंक और पोटैशियम से भरपूर होती हैं। मसूर दाल में 25% से अधिक प्रोटीन होता है, जो इन्हें मांस का उत्कृष्ट विकल्प बनाता है। ये आयरन का भी अच्छा स्रोत हैं, शाकाहारी आहार में कभी-कभी कमी हो जाती है तब भी हम इसको ले सकते हैं विभिन्न प्रकार की मसूर में पोषक तत्व थोड़े भिन्न हो सकते हैं, लेकिन 1 कप (198 ग्राम) पकी हुई मसूर दाल में आमतौर पर निम्न होता है:

  • कैलोरी: 230
  • कार्ब्स: 39.9 ग्राम
  • प्रोटीन: 17.9 ग्राम
  • फैट: 0.8 ग्राम
  • फाइबर: 15.6 ग्राम
  • थायमिन: दैनिक आवश्यकता का 28%
  • नियासिन: 13%
  • विटामिन B6: 21%
  • फोलेट: 90%
  • पैंटोथेनिक एसिड: 25%
  • आयरन: 37%
  • मैग्नीशियम: 17%
  • फॉस्फोरस: 28%
  • पोटैशियम: 16%
  • जिंक: 23%
  • कॉपर: 55%
  • मैंगनीज: 43%

मसूर दाल में फाइबर अधिक होता है, जो नियमित मल त्याग को बढ़ावा देता है और स्वस्थ आंत बैक्टीरिया के विकास में मदद करता है। मसूर की दाल खाने से खाने से मल का वजन बढ़ता है और आंत की कार्यप्रणाली सुधारती है। इसके अलावा, मसूर में लाभकारी पौधों के यौगिक फाइटोकेमिकल्स होते हैं, जो हृदय रोग और टाइप 2 डायबिटीज जैसी पुरानी बीमारियों से बचाव करते हैं।

हृदय की रक्षा कर सकती है

अगर आपको ह्रदय रोग का जोखिम भी कम करना है तो मसूर दाल खाने से आपको लाभ हो सकता है, क्योंकि ये कई जोखिम कारकों पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं। एक 8-साप्ताहिक अध्ययन में अधिक वजन या मोटापे और टाइप 2 डायबिटीज वाले 39 लोगों में रोजाना 1/3 कप (60 ग्राम) मसूर खाने से अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) का स्तर बढ़ा और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) तथा ट्राइग्लिसराइड्स काफी कम हुए। मसूर ब्लड प्रेशर कम करने में भी मदद कर सकती है।

चूहों पर एक अध्ययन में मसूर खाने वालों में अन्य दालों की तुलना में ब्लड प्रेशर अधिक कम हुआ। इसके अलावा, मसूर के प्रोटीन एंजियोटेंसिन I-कन्वर्टिंग एंजाइम को ब्लॉक कर सकते हैं, जो रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है और ब्लड प्रेशर बढ़ाता है। होमोसिस्टीन का उच्च स्तर हृदय रोग का एक अन्य जोखिम कारक है। फोलेट की कमी से यह बढ़ सकता है। मसूर फोलेट का अच्छा स्रोत होने से शरीर में अतिरिक्त होमोसिस्टीन जमा होने से रोक सकती है। मोटापा हृदय रोग का जोखिम बढ़ाता है। मसूर की दाल खाने से खाने से भोजन की मात्रा कम हो सकती है, जो वजन घटाने या बनाए रखने में मदद करती है। मसूर बहुत भरपेट होती हैं और ब्लड शुगर स्थिर रखती हैं।

दाल में मौजूद एंटीऊट्रिएंट्स(Antinutrients) और उन्हें कैसे हैंडल करें

दाल में कुछ एंटीऊट्रिएंट्स जैसे फाइटिक एसिड और लेक्चिन्स होते हैं, जो पोषक तत्वों के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन चिंता न करें – सही तरीके से पकाने से ये 70-80% तक कम हो जाते हैं। आपकी फ्रस्ट्रेशन जैसे “दाल पचती नहीं” को दूर करने के लिए, दाल को रातभर भिगोएं। इससे दाल का पोषण बेहतर तरीके से बॉडी में अब्जॉर्ब होता है। भिगोने से आयरन और जिंक का अवशोषण 50% तक बढ़ जाता है।

दाल पकाने के आसान तरीके

अब आते हैं मुख्य भाग पर – दाल कैसे पकाएं। कई लोगों की पेन पॉइंट है कि दाल पकाना टाइम लेता है या स्वाद नहीं आता। लेकिन सरल स्टेप्स से यह आसान हो जाता है। सबसे पहले, दाल को अच्छे से धोएं। फिर, प्रेशर कुकर में 1 कप दाल के लिए 3 कप पानी डालें, नमक और हल्दी मिलाएं, और 3-4 सीटी तक पकाएं।

यहां कुछ रेसिपी:

सरल मूंग दाल

  • सामग्री: 1 कप मूंग दाल, 1 प्याज, 2 टमाटर, जीरा, हल्दी, नमक।
  • विधि: दाल भिगोएं, कुकर में पकाएं। तड़का लगाएं – जीरा, प्याज भूनें, टमाटर डालें। मिलाकर सर्व करें। यह दाल से पाचन सुधार में मदद करती है। समय: 20 मिनट।

मसूर दाल सूप:

  • सामग्री: 1 कप मसूर दाल, गाजर, पालक, लहसुन।
  • विधि: दाल उबालें, सब्जियां मिलाएं, ब्लेंड करें। यह दाल से एनर्जी बढ़ाना के लिए बढ़िया है।

चना दाल फ्राई:

सामग्री: 1 कप चना दाल, मसाले।

विधि: पकाएं और तड़का लगाएं। दाल में प्रोटीन से भरपूर।

मिक्स दाल

तीन प्रकार की दाल मिलाएं – तूर, मूंग, उड़द। पकाएं और सर्व करें। यह सभी दाल के पोषक तत्व देती है। ये रेसिपी आपकी फ्रस्ट्रेशन दूर करेंगी और डिजायर्स पूरी करेंगी।

दाल को डाइट में कैसे शामिल करें

दाल को रोजाना शामिल करने के टिप्स:

  • ब्रेकफास्ट: दाल पराठा।
  • लंच: दाल-चावल।
  • डिनर: दाल सूप।
  • स्नैक्स: दाल चाट।

यह आपकी इंटेंशन्स जैसे हेल्दी ईटिंग को सपोर्ट करेगा। अगर आप वेजिटेरियन हैं, तो दाल मीट का सब्स्टीट्यूट है।

दाल के साइड इफेक्ट्स और सावधानियां

ज्यादातर लोगों के लिए दाल सुरक्षित है, लेकिन ज्यादा खाने से गैस हो सकती है। धीरे-धीरे बढ़ाएं। किडनी प्रॉब्लम वाले डॉक्टर से पूछें।

निष्कर्ष

दाल का पोषण हमें स्वस्थ रखने का एक आसान तरीका है। इसके लाभ जैसे दाल से इम्यूनिटी बूस्ट और दाल से हड्डियां मजबूत हमें मोटिवेट करते हैं। सही रेसिपी से यह स्वादिष्ट भी बन जाती है। अपनी डाइट में शामिल करें और फर्क महसूस करें। अगर कोई सवाल हो, कमेंट करें!

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. क्या दाल खाने से गैस या ब्लोटिंग की समस्या होती है?

हां, कुछ लोगों को दाल खाने से गैस या ब्लोटिंग हो सकती है, खासकर अगर वे एकदम से ज्यादा मात्रा में शुरू करें। इसका मुख्य कारण दाल में मौजूद रैफिनोज जैसे कॉम्प्लेक्स शुगर होते हैं जिन्हें पचाने में आंत को मेहनत करनी पड़ती है।

2. प्रेग्नेंसी में कितनी दाल खानी चाहिए?

प्रेग्नेंसी में दाल बहुत फायदेमंद है क्योंकि इसमें फोलेट, प्रोटीन और आयरन भरपूर होता है। डॉक्टर्स आमतौर पर रोजाना ½ से 1 कप पकी हुई दाल खाने की सलाह देते हैं। यह बच्चे के न्यूरल ट्यूब डेवलपमेंट और मां की एनर्जी के लिए जरूरी है। बस ध्यान रखें कि अच्छे से पकी हो और साफ-सुथरी हो। अगर कोई एलर्जी या पाचन समस्या हो तो डॉक्टर से जरूर पूछें।

3. बच्चों को दाल कब और कैसे शुरू करवाएं?

6 महीने से ऊपर के बच्चों को दाल शुरू कर सकते हैं। पहले मूंग दाल का पतला सूप बनाकर दें क्योंकि यह सबसे आसानी से पचती है। शुरू में 1-2 चम्मच से शुरुआत करें और धीरे-धीरे मात्रा बढ़ाएं। 1 साल के बाद मसूर, तूर या मिक्स दाल भी दे सकते हैं। नमक बहुत कम डालें और तड़का हल्का रखें। दाल बच्चों के लिए बेहतरीन प्रोटीन और आयरन का स्रोत है।

4. क्या दाल और चावल साथ में खाना कंपलीट प्रोटीन देता है?

जी हां! दाल में लाइसिन नाम का अमीनो एसिड ज्यादा होता है जो चावल में कम होता है, और चावल में मेथियोनीन ज्यादा होता है जो दाल में कम होता है। दोनों को साथ खाने से हमें सभी जरूरी अमीनो एसिड मिल जाते हैं – इसे कंपलीट प्रोटीन कहते हैं। यही वजह है कि दाल-चावल या दाल-रोटी भारत का सबसे पॉपुलर और पौष्टिक कॉम्बिनेशन है।

5. दाल को स्टोर करने का सही तरीका क्या है?

दाल को नमी और कीड़ों से बचाना बहुत जरूरी है।

  • एयरटाइट डिब्बे में रखें।
  • ठंडी और सूखी जगह पर स्टोर करें।
  • खरीदते समय तारीख चेक करें और 6-12 महीने में इस्तेमाल कर लें।
  • कीड़े लगने से बचाने के लिए डिब्बे में 2-3 सूखी लाल मिर्च या तेजपत्ता डाल सकते हैं। इससे दाल के पोषक तत्व लंबे समय तक बने रहते हैं।

6. जिम जाने वाले लोगों के लिए दाल कितनी फायदेमंद है?

जिम जाने वालों या मसल्स बनाने वालों के लिए दाल शानदार प्लांट-बेस्ड प्रोटीन स्रोत है। 100 ग्राम पकी चना या उड़द दाल में 15-20 ग्राम तक प्रोटीन मिल जाता है। यह व्हे प्रोटीन का अच्छा और सस्ता विकल्प है। वर्कआउट के बाद दाल की खिचड़ी, दाल पराठा या स्प्राउटेड दाल सलाद खाएं तो रिकवरी बेहतर होती है। साथ में थोड़ा दही या पनीर मिला लें तो और कंपलीट हो जाता है।

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